वे व्यक्ति जिनकी कुंडली में राहु पहले, छठे या दसवें भाव में स्थित है हेसोनाइट रत्न धारण करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहु आठवें या बारहवें भाव में स्थित है, उन्हें तीन दिन की परीक्षण अवधि के बाद रत्न धारण करना चाहिए।
गोमेद किसे नहीं पहनना चाहिए?
लोगों को 25 वर्ष से अधिक उम्र केइस रत्न का प्रयोग करना चाहिए। इस संबंध में कोई ऊपरी आयु सीमा नहीं है। राहु का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है और राहु 3, 6, 10, 11 के अलावा अन्य घरों में है तो राहु के संकट से राहत पाने के लिए हेसोनाइट पहन सकते हैं।
हेसोनाइट क्यों पहना जाता है?
गोमेद रत्न यह सुनिश्चित करता है कि राहु के दुष्प्रभाव से कुछ राहत मिले। यह इस भ्रम को दूर करने में मदद करता है कि राहु दोष वाले जातकों का सामना करना पड़ता है। यह उनके जीवन में आत्मविश्वास, स्थिरता के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा लाने में भी मदद करता है।
हेसोनाइट किसके लिए अच्छा है?
हेसोनाइट पहनने के क्या फायदे हैं? एक समान गोमूत्र रंग का गोमेद वैदिक ग्रह राहु के बुरे प्रभाव को बेअसर करता है और पहनने वाले को नकारात्मक वाइब्स और ऊर्जाओं से बचाता है। यह पहनने वाले के मन को शांत करता है और उसे अवसाद, गहरी बैठी हुई चिंताओं और मानसिक समस्याओं से मुक्त करता है।
गोमेद कब धारण करना चाहिए?
शनिवार प्रातःकाल का समय गोमेद धारण करने का उत्तम समय बताया गया है। इसे आप सुबह 5 से 7 बजे के बीच कभी भी पहन सकती हैं। रत्न को उसके सर्वोत्तम स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए,पहनने की वैदिक प्रक्रिया का पालन करना महत्वपूर्ण है।